People's Engagement With News
Mobile : +91 9928015504
People's Engagement With News
Mobile : +91 9928015504

पानी की घण्टी

हमारे गांव देहात में पानी की किल्लत तो है ही आदत भी पानी कम पीने की ही है। जबकि सत्तर फीसद पानी ही है हमारे षरीर में। ये आदत बच्चों और युवाओं में भी आ गई है। सरकारी स्कूलों में पीने के पानी को लेकर कई प्रयोग हो रहे हैं और पानी की टंकियों की सफाई की तारीख टंकियों पर दर्ज रहने लगी है। केरल के स्कूलों में पानी पीना है ये याद दिलाने के लिए पानी की घण्टी भी बजने लगी है अब। बच्चों के डॉक्टर्स का कहना है कि खास तौर से लड़कियां पानी कम पीती हैं और स्कूल में पानी पीने से परहेज़ करती हैं ताकि शौचालय नहीं जाना पड़े।

वजह है स्कूलों में गन्दे शौचालय। बच्चों और किशोर-किशोरियों को दिन भर में कम से कम डेढ़ से तीन लीटर पानी जरूर पीना चाहिए। पानी कम पीने से डीहाइड्रेषन हो जाता है और सिरदर्द, थकान, चिड़चिड़ापन होने के साथ ही इसका असर किडनी, यकृत और दिमाग पर भी हो सकता है। चिकित्सक बताते हैं कि पेशाब की जगह संक्रमण होने के मामले लड़कियों के ही ज्यादा आते हैं। पानी कम पीना और शौचालय साफ नहीं होना ही इस संक्रमण की बड़ी वजह बनते हैं। हाल ही केन्द्र सरकार ने स्कूलों में शौचालय निर्माण के साथ साथ उनकी स्वच्छता पर भी मुहिम छेड़ी है।